Dedicated to my wife…

Read on to know what happens to men who marry in India

Archive for the ‘Hindi’ Category

पत्नियों से ज्यादा पीड़ित पति

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

Commando Rajesh Vakaria from Nagpur is in news again.

Earlier it was the following video:

This time it is the following article:

http://www.visfot.com/index.php/news_never_die/2038.html

अभी तक ज्यादातर महिलाओं पर अत्याचार के मामले सामने आते रहे हैं। इसे रोकने के लिए सशक्त कानून भी बनाए गए हैं। समय बदल रहा है। महिला सशक्तिकरण के जमाने में अब पति पत्नी से पीडि़त हैं। चाहे वे पत्नी के लगाए गए दहेज प्रताडऩा और घरेलू हिंसा के झूठे आरोप हों या फिर घर में आपसी कलह। पत्नी पीिड़ता कहां जाए? न कोई हमदर्दी न कोई सरकारी मदद। नतीजा? पीड़ित पतियों के आत्महत्या का अनुपात पीड़ित पत्नियों से दोगुना है.

इस तथ्य पर बाद में आते हैं लेकिन पहले आपको यह बताते हैं कि 19 नंवबर को तंग पति अंतरराष्ट्रीय पति दिवस के रूप में मनाते हैं। पार्टी करके। बैठक करके। फिल्म देखकर। कुछ पीड़ितों का समूहिक पिकनिक मनाकर एक दिन खुशियों को जी रहे हैं। अपने लिए शायद वैसा दिन पत्नी के साथ फिर कभी नहीं जी पाएंगे। हकीकत बदल रही है। यकीन मानिये जितनी हिंसा महिलाओं के साथ हो रही है, वैसी ही हिंसा पुरुषों के साथ हो रही है। दो वर्ग बन गए हैं। एक ओर जहां पति पत्नी को पीटता है, वहीं दूसरे वर्ग में पत्नी से पति पीडित होकर दिल में टीस लिए जिंदगी से हर आस छोड़ रहा है।

पहली बार त्रिनिदाद और टोबैगो में 1999 में 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में मनाया गया। भारत में इसी शुरुआत 2007 से हुई। पत्नी से प्रताडि़त होने के मामले में देश का कोई शहर अछूता नहीं है। बस अंतर इतना है कि महिलाओं से जुड़ी हिंसा को मीडिया ज्यादा कवरेज देता है। पीड़ित पति शर्म संकोच से कहीं नही जाते हैं। करीब डेढ़ दशक पूर्व दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कई जगह लिखा हुआ मिलता था – पत्नी सताएं तो हमे बताएं, मिले नहीं लिखें। अब वो तख्ती तो नहीं दिखती है, लेकिन पीड़ित बढ़ गए हैं.

आए दिन शादीशुदा पुरुषों की आत्महत्या के मामले प्रकाश में आते हैं। पर इसके पीछे की सच्चाई से बहुत कम ही लोग ही रू-ब-रू हो पाते हैं। कई बार इन कानूनों का दुरुपयोग कर पत्नी पति को प्रताड़ित करती है। इससे तंग आकर अनेक लोगों ने आत्महत्या की राह चुनी है।

वर्षों गुजर गए। पत्नी पीड़ितों के समूह ने संगठित होकर सरकार से लगातार संघर्ष कर देहज उत्पीडन के कानून 498-ए में बदलाव कर इस जमानती बनाने की मांग कर रहा है। बदलाव के लिए सरकार विचार कर रही है। संगठन अलग पुरुष कल्याण मंत्रालय की मांग कर रहे हैं। पुरुषों के पक्ष में दस्ताबेज जुगाड़ कर सरकार के पास ज्ञापन भेजकर लगातार दवाब बना रहे हैं। कई शहरों में पत्नी पीडि़तों का समूह कही चुपचाप तो कहीं खुलेआम बैठक करते हैं। एक-दूसरे की समस्या सुनते हैं और सहयोग करते हैं। जब नया पीड़ित आता है तो उनकी काउंसलिंग होती है जिससे कि वह आत्महत्या न कर सके।

पत्नी पीड़ित राजेश बखारिया दहेज उत्पीडऩ कानून के चक्कर में वर्षों से कोर्ट के चक्कर काटते-काटते इस अपने जैसे दूसरे पीड़ितों का दु:ख दर्द बांटते हैं। सहयोग करते हैं। कहते हैं कि अब तो नई नवेली दुलहन भी छोटी-छोटी बात पर दहेज विरोधी काननू का हवाला देकर घर-परिवार में वर्चस्व जमाने की कोशिश करती हैं। खेद की बात है कि जैसे ही पत्नी आरोप लगाती है और बात थाने तक पहुंचती है और मामला दर्ज होता है तो पति को जेल जाना पड़ता है। वह घोर अवसाद का शिकार हो जाता है। पत्नी की हरकतों से बेटे-भाई की जिंदगी में पडऩे वाली खलल से कई मां-बहनों का दिल टूटा है। युवा पति कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते-काटते अधेड़ हो रहे हैं। लिहाजा, इस चक्कर में पड़े अधिकतर लोग आत्महत्या को अंतिम विकल्प मान लेते हैं। क्योंकि जैसे ही पत्नी के अरोप पुलिस दर्ज करती है, नौकरी चाहे सरकारी हो या निजी चली जाती है।

श्रम और रोजगार मंत्रालय के वर्ष 2001-05 के जारी आंकड़ों के मुताबिक निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों से करीब 14 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। कई सर्वे व जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि आईपीसी की धारा 498 ए का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। इसके तहत कई पतियों पर दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने के झूठे अरोप लगे हैं। दो साल पूर्व लागू घरेलू हिंसा उन्नमूलन कानून 2005 से तो महिलाओं को और ताकत दे दी है। उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2006 में एक सिविल याचिका 583 में यह टिप्पणी की थी कि इस कानून को तैयार करते समय कई खामियां रह गई हैं। उन खामियों का फायदा उठा कर कई पत्नियां पति को धमका रही हैं। उन्होंने बताया कि आंकड़े देखें तो औसतन जहां हर 19 मिनट में देश में किसी व्यक्ति की हत्या होती है, वहीं हर 10 मिनट में एक विवाहित व्यक्ति आत्महत्या करता है। वर्ष 2005-07 के आंकड़ों के मुताबिक दहेज उत्पीडऩ मामले में कानून की धारा 498-ए, के तहत 1,39,058 मामले दर्ज हुए।

पत्नी पीड़ितों की एक संस्था सेव इंडिया फैमिली फउंडेशन पत्नी पीड़ितों को काउंसलिंग से मामले सुलझाने की कोशिश करता है। फाउंडेशन सरकार पर लगातार स्वतंत्र रूप से पुरुष कल्याण मंत्रालय बनाने की मांग कर रहा है। श्री बखारिया का कहना है कि यदि पत्नी किसी भी कारण से आत्महत्या करती है तो पुलिस तुरंत केस दर्ज कर आरोपियों को हवालात में ले लेती है। घर घरेलू कलह से तंग आकर पति आत्महत्या करता है तो पत्नी से पूछताछ तक नहीं होती है। पत्नी के प्रताड़ित करने के अधिकतर मामले साल 2000 से तेजी से बढ़े हैं। इसका प्रमुख जिम्मेदार टीवी पर प्रसारित होने वाले कुछ धारावाहिक हैं जिनकी अनाप-शनाप कहानी में नकारात्मक छवि वाली महिला पात्रों ने समाज में गलत असर छोड़ा है। लड़कों वालों में वधु पक्ष के परिवार के अनावश्यक हस्तक्षेप बढ़ा है जिससे महिलाओं में अहम आ जाता है।

देश में आत्महत्या के मामले वर्ष 2005-07
विवाहित पुरुष    विवाहित महिलाएं
1,65,528      88,128

आत्महत्या का अनुपात प्रतिशत
विवाहित पुरुष    विवाहित महिलाएं
65.25           34.75

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एक ऐसी बारात, दुल्हे के हाथ में हथकड़ी

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

In Lucknow, there was a marriage procession, where all men were dressed as groom with handcuffs….. and many women who were accompanying them were also handcuffed. India is great !

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=37&edition=2009-11-20&pageno=6

लखनऊ, 19
नवम्बर, (जागरण संवाददाता) : शहर में आज एक ऐसी बारात निकली जिसमें पकड़ी व सेहरा बांधे अधिकांश दुल्हे थे और उनकी हाथों में लगी थी हथकड़ी। साथ में
महिलाएं भी थीं। इनमें से भी कुछ के हाथ में हथकड़ी थी।
चौकिये नहीं! महिलाओं द्वारा कानूनी प्राविधानों का किये जा रहे दुरुपयोग
की बढ़ती संख्या के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए पति-परिवार
कल्याण समिति के बैनर तले निकली अनोखी बारात का यह दृश्य था। कलेक्ट्रेट से निकली यह बारात परिवारिक न्यायालय होते हुए विधान भवन धरना स्थल पर
पहुंचा। इस मौके पर पति-परिवार कल्याण समिति ने पुरूष आयोग, पुरूष विकास
मंत्रालय तथा पुरूषों की सुरक्षा व न्याय प्राप्ति के लिए कोई कानून बनाने
की मांग की। समिति के सचिव बृजेश अवस्थी का कहना है कि महिलाओं के लिए
बनाये गये कई कानून ऐसे हैं, जो पूर्णतया एकतरफा हैं। उन्होंने कहा कि
नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़े पर नजर डालें तो प्रत्येक वर्ष विवाहित
महिलाओं की तुलना में पुरुषों की अप्राकृतिक मृत्यु दोगुने से भी ज्यादा
हुई है।

 

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पुरुष भी हैं घरेलू हिंसा का शिकार

Posted by iluvshrutiverma on October 13, 2009

लुधियाना . स्वतंत्र आवाज वेलफेयर आग्रेनाइजेशन ने दहेज व घरेलू हिंसा कानून के दुरुपयोग के मसले उठाए है। आग्रेनाइजेशन के अनुसार पिछले पांच वर्षो के दौरान देश में दहेज प्रताड़ना के मात्र दो प्रतिशत मामले ही साबित हो पाए हैं। साफ जाहिर है कि इस कानून का दुरुपयोग रहा है। पुरुष भी घरेलू हिंसा का शिकार हो रहे हैं, लेकिन विडंबना है कि कानून उनकी इस शिकायत पर गौर नहीं कर रहा है।

अगर एक महिला अपने पति या ससुरालियों के खिलाफ थाने में दहेज उत्पीड़न की झूठी शिकायत भी दे देती है, तो पुलिस बिना जांच उस पूरे परिवार को उठा लाती है। बिना कसूर परिवार को जेल में रहना पड़ता है। महिला सशक्तिकरण के लिए सरकारें काम कर रही हैं और कानून भी महिलाओं के हक में बनाए गए हैं, लेकिन दहेज उत्पीड़न में वृद्ध महिलाएं व अविवाहित लड़कियां भी कष्ट झेलती हैं। ऐसे कई केस हैं जब रंजिशन दर्ज कराए मामलों में किशोर सदस्यों को भी जेल में धकेल दिया जाता है।

आग्रेनाइजेशन के सदस्य गौरव सैनी के अनुसार वह संसद को इस बारे में ज्ञापन भेज कर संशोधन के लिए आग्रह करेंगे। गौरव सैनी के मुताबिक पुलिस ऐसे मामलों को दर्ज करने में कोई जल्दबाजी दिखाए बिना पूरी जांच के बाद केस दर्ज करे। दफा 498—ए को जमानत योग्य बनाया जाए। वह पंजाब में करीब 500 परिवारों के केसों का ब्यौरा एकत्रित कर चुके हैं। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए हेल्प लाइन भी जारी की है।

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