Dedicated to my wife…

Read on to know what happens to men who marry in India

Archive for November 21st, 2009

A cop all over, cooks up evidence

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

Read about how police cooks evidence in false dowry harassment cases

http://www.deccanchronicle.com/bengaluru/cop-all-over-cooks-evidence-240

Bengaluru, Nov. 20: When a city police inspector claims that he was in two different places at a given time on the same day, something seems to have gone terribly wrong.

The officer is A. Manjunath, currently serving as police inspector with city special branch. He was inspector at Yeshwanthpur police station when the incident happened in 2007.

According to the station diary, Manjunath was at the station and with an accused, writing a panchnama at the same time. On another day, he claims he was busy recording the statement of five witnesses, while his official papers say he was on leave, sanctioned by none other than his DGP!

The police also seems to have duped the court by submitting a dead man’s witness statement, which made the court even issue summons asking the deceased to be present for the hearing.

Mr R. Kumar (name changed) was accused of dowry harassment by his wife who visited the station on July 26, 2007. “She filed a complaint at 1.45 pm. Inspector Manjunath claims he visited my residence between 2 pm and four pm on the same day for panchanama. But his station diary shows he was present in the station till 4 pm”, claimed Kumar.

Again, Manjunath claims that he recorded the statements of five witnesses on July 30, 2007 including one of a doctor. “But his office files say he was in Mysore after getting two days’ leave, sanctioned by his DGP,” said Kumar.

More intriguing is the fact that one of the witnesses had died the previous day on July 29, after he spent more than 10 hours in coma. So how did the inspector took his statement?

According to R. Kumar, the trouble begun soon after his wife filed the dowry harassment complaint. “Just one month after our marriage, I realised that my wife was suffering from a sexually transmitted disease. On questioning her, she admitted to a premarital affair with another man” he said.

Later, she returned to her parents after a gynaecologist advised her treatment. “We mutually decided to go for a divorce and approached the family court in 2005. But I was shocked when she filed a dowry harassment complaint against me” said 32-year-old Kumar, a private company employee.

He also alleged that Manjunath not only detained him illegally for a day, but pestered him to shell out money to ‘settle the issue’.

“Dejected over the false allegations, my 62-year-old father attempted suicide by consuming poison. Instead of showing some mercy, the Yeshwanthapur police even threatened to arrest me”, says Kumar, who later approached Lokayukta with all the documents, which he obtained with the help of RTI. According to Kumar, Lokayukta asked the police officer about obtaining a dead man’s statement on which Manjunath claimed he took his statement on July 29, 2007, hours before he died. “Again his office records say he was on bundobust duty following a strike by KSRTC employees” said Kumar.

The investigating police officials have erred right from the FIR to the witness statement” claimed Kumar.

When contacted, Manjunath said the confusion over the date was because of a technical and manual error. “The computer operator wrongly entered the date as July 30 instead of July 29. In a hurry, I signed a letter dated July 30,” he said. He however refused to comment further on the issue.

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पत्नियों से ज्यादा पीड़ित पति

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

Commando Rajesh Vakaria from Nagpur is in news again.

Earlier it was the following video:

This time it is the following article:

http://www.visfot.com/index.php/news_never_die/2038.html

अभी तक ज्यादातर महिलाओं पर अत्याचार के मामले सामने आते रहे हैं। इसे रोकने के लिए सशक्त कानून भी बनाए गए हैं। समय बदल रहा है। महिला सशक्तिकरण के जमाने में अब पति पत्नी से पीडि़त हैं। चाहे वे पत्नी के लगाए गए दहेज प्रताडऩा और घरेलू हिंसा के झूठे आरोप हों या फिर घर में आपसी कलह। पत्नी पीिड़ता कहां जाए? न कोई हमदर्दी न कोई सरकारी मदद। नतीजा? पीड़ित पतियों के आत्महत्या का अनुपात पीड़ित पत्नियों से दोगुना है.

इस तथ्य पर बाद में आते हैं लेकिन पहले आपको यह बताते हैं कि 19 नंवबर को तंग पति अंतरराष्ट्रीय पति दिवस के रूप में मनाते हैं। पार्टी करके। बैठक करके। फिल्म देखकर। कुछ पीड़ितों का समूहिक पिकनिक मनाकर एक दिन खुशियों को जी रहे हैं। अपने लिए शायद वैसा दिन पत्नी के साथ फिर कभी नहीं जी पाएंगे। हकीकत बदल रही है। यकीन मानिये जितनी हिंसा महिलाओं के साथ हो रही है, वैसी ही हिंसा पुरुषों के साथ हो रही है। दो वर्ग बन गए हैं। एक ओर जहां पति पत्नी को पीटता है, वहीं दूसरे वर्ग में पत्नी से पति पीडित होकर दिल में टीस लिए जिंदगी से हर आस छोड़ रहा है।

पहली बार त्रिनिदाद और टोबैगो में 1999 में 19 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस के रूप में मनाया गया। भारत में इसी शुरुआत 2007 से हुई। पत्नी से प्रताडि़त होने के मामले में देश का कोई शहर अछूता नहीं है। बस अंतर इतना है कि महिलाओं से जुड़ी हिंसा को मीडिया ज्यादा कवरेज देता है। पीड़ित पति शर्म संकोच से कहीं नही जाते हैं। करीब डेढ़ दशक पूर्व दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कई जगह लिखा हुआ मिलता था – पत्नी सताएं तो हमे बताएं, मिले नहीं लिखें। अब वो तख्ती तो नहीं दिखती है, लेकिन पीड़ित बढ़ गए हैं.

आए दिन शादीशुदा पुरुषों की आत्महत्या के मामले प्रकाश में आते हैं। पर इसके पीछे की सच्चाई से बहुत कम ही लोग ही रू-ब-रू हो पाते हैं। कई बार इन कानूनों का दुरुपयोग कर पत्नी पति को प्रताड़ित करती है। इससे तंग आकर अनेक लोगों ने आत्महत्या की राह चुनी है।

वर्षों गुजर गए। पत्नी पीड़ितों के समूह ने संगठित होकर सरकार से लगातार संघर्ष कर देहज उत्पीडन के कानून 498-ए में बदलाव कर इस जमानती बनाने की मांग कर रहा है। बदलाव के लिए सरकार विचार कर रही है। संगठन अलग पुरुष कल्याण मंत्रालय की मांग कर रहे हैं। पुरुषों के पक्ष में दस्ताबेज जुगाड़ कर सरकार के पास ज्ञापन भेजकर लगातार दवाब बना रहे हैं। कई शहरों में पत्नी पीडि़तों का समूह कही चुपचाप तो कहीं खुलेआम बैठक करते हैं। एक-दूसरे की समस्या सुनते हैं और सहयोग करते हैं। जब नया पीड़ित आता है तो उनकी काउंसलिंग होती है जिससे कि वह आत्महत्या न कर सके।

पत्नी पीड़ित राजेश बखारिया दहेज उत्पीडऩ कानून के चक्कर में वर्षों से कोर्ट के चक्कर काटते-काटते इस अपने जैसे दूसरे पीड़ितों का दु:ख दर्द बांटते हैं। सहयोग करते हैं। कहते हैं कि अब तो नई नवेली दुलहन भी छोटी-छोटी बात पर दहेज विरोधी काननू का हवाला देकर घर-परिवार में वर्चस्व जमाने की कोशिश करती हैं। खेद की बात है कि जैसे ही पत्नी आरोप लगाती है और बात थाने तक पहुंचती है और मामला दर्ज होता है तो पति को जेल जाना पड़ता है। वह घोर अवसाद का शिकार हो जाता है। पत्नी की हरकतों से बेटे-भाई की जिंदगी में पडऩे वाली खलल से कई मां-बहनों का दिल टूटा है। युवा पति कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते-काटते अधेड़ हो रहे हैं। लिहाजा, इस चक्कर में पड़े अधिकतर लोग आत्महत्या को अंतिम विकल्प मान लेते हैं। क्योंकि जैसे ही पत्नी के अरोप पुलिस दर्ज करती है, नौकरी चाहे सरकारी हो या निजी चली जाती है।

श्रम और रोजगार मंत्रालय के वर्ष 2001-05 के जारी आंकड़ों के मुताबिक निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों से करीब 14 लाख लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा। कई सर्वे व जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि आईपीसी की धारा 498 ए का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। इसके तहत कई पतियों पर दहेज के लिए पत्नी को प्रताड़ित करने के झूठे अरोप लगे हैं। दो साल पूर्व लागू घरेलू हिंसा उन्नमूलन कानून 2005 से तो महिलाओं को और ताकत दे दी है। उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2006 में एक सिविल याचिका 583 में यह टिप्पणी की थी कि इस कानून को तैयार करते समय कई खामियां रह गई हैं। उन खामियों का फायदा उठा कर कई पत्नियां पति को धमका रही हैं। उन्होंने बताया कि आंकड़े देखें तो औसतन जहां हर 19 मिनट में देश में किसी व्यक्ति की हत्या होती है, वहीं हर 10 मिनट में एक विवाहित व्यक्ति आत्महत्या करता है। वर्ष 2005-07 के आंकड़ों के मुताबिक दहेज उत्पीडऩ मामले में कानून की धारा 498-ए, के तहत 1,39,058 मामले दर्ज हुए।

पत्नी पीड़ितों की एक संस्था सेव इंडिया फैमिली फउंडेशन पत्नी पीड़ितों को काउंसलिंग से मामले सुलझाने की कोशिश करता है। फाउंडेशन सरकार पर लगातार स्वतंत्र रूप से पुरुष कल्याण मंत्रालय बनाने की मांग कर रहा है। श्री बखारिया का कहना है कि यदि पत्नी किसी भी कारण से आत्महत्या करती है तो पुलिस तुरंत केस दर्ज कर आरोपियों को हवालात में ले लेती है। घर घरेलू कलह से तंग आकर पति आत्महत्या करता है तो पत्नी से पूछताछ तक नहीं होती है। पत्नी के प्रताड़ित करने के अधिकतर मामले साल 2000 से तेजी से बढ़े हैं। इसका प्रमुख जिम्मेदार टीवी पर प्रसारित होने वाले कुछ धारावाहिक हैं जिनकी अनाप-शनाप कहानी में नकारात्मक छवि वाली महिला पात्रों ने समाज में गलत असर छोड़ा है। लड़कों वालों में वधु पक्ष के परिवार के अनावश्यक हस्तक्षेप बढ़ा है जिससे महिलाओं में अहम आ जाता है।

देश में आत्महत्या के मामले वर्ष 2005-07
विवाहित पुरुष    विवाहित महिलाएं
1,65,528      88,128

आत्महत्या का अनुपात प्रतिशत
विवाहित पुरुष    विवाहित महिलाएं
65.25           34.75

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Mumbai…on the road

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

On International Men’s day, mumbai came on the road handcuffed in order to protest against the gender biased laws – to demand a men’s welfare ministry and to request society to treat them as humans and not animals.

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एक ऐसी बारात, दुल्हे के हाथ में हथकड़ी

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

In Lucknow, there was a marriage procession, where all men were dressed as groom with handcuffs….. and many women who were accompanying them were also handcuffed. India is great !

http://in.jagran.yahoo.com/epaper/index.php?location=37&edition=2009-11-20&pageno=6

लखनऊ, 19
नवम्बर, (जागरण संवाददाता) : शहर में आज एक ऐसी बारात निकली जिसमें पकड़ी व सेहरा बांधे अधिकांश दुल्हे थे और उनकी हाथों में लगी थी हथकड़ी। साथ में
महिलाएं भी थीं। इनमें से भी कुछ के हाथ में हथकड़ी थी।
चौकिये नहीं! महिलाओं द्वारा कानूनी प्राविधानों का किये जा रहे दुरुपयोग
की बढ़ती संख्या के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए पति-परिवार
कल्याण समिति के बैनर तले निकली अनोखी बारात का यह दृश्य था। कलेक्ट्रेट से निकली यह बारात परिवारिक न्यायालय होते हुए विधान भवन धरना स्थल पर
पहुंचा। इस मौके पर पति-परिवार कल्याण समिति ने पुरूष आयोग, पुरूष विकास
मंत्रालय तथा पुरूषों की सुरक्षा व न्याय प्राप्ति के लिए कोई कानून बनाने
की मांग की। समिति के सचिव बृजेश अवस्थी का कहना है कि महिलाओं के लिए
बनाये गये कई कानून ऐसे हैं, जो पूर्णतया एकतरफा हैं। उन्होंने कहा कि
नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़े पर नजर डालें तो प्रत्येक वर्ष विवाहित
महिलाओं की तुलना में पुरुषों की अप्राकृतिक मृत्यु दोगुने से भी ज्यादा
हुई है।

 

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Men are more emotional than women

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

http://www.siliconindia.com/shownews/Men_are_more_emotional_than_women-nid-63125.html

Bangalore: Tying the knot makes men feel happy to the worth of 18,000 pounds while women experience the joy worth only half the amount.

Paul Frijters, Queensland University of Technology, estimated the value of happiness in terms of cash for the major events in life like marriage, divorce and illness. Each of the event shows different results for men and women.
While divorce leave men feeling a loss of 61,500 pounds, for women it was a just a loss of 5,000 pounds.
The birth of a child created a low cash amount, about 18,000 pounds for a man and less than 5,000 pounds for a woman.
According to the findings, the death of a partner or a child creates the feeling of a loss of 73,000 pounds to a woman and more than 350,000 pounds to a man.
Losing a loved one has a much bigger effect than gaining a loved one. There’s an asymmetry between life and death. This shouldn’t surprise us. Human beings seem to notice losses more than gains.

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Mard kutte hote hain wafadar nahin

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

Bizman files complaint against the director for ‘men are dogs’ comment on TV show

Notice: Imagine if someone said on the TV that women are bitches then what would have happened!

http://www.mid-day.com/news/2009/aug/070809-Dus-Ka-Dum-Chembur-businessman-Abdul-Samad-Khan-Farah-Khan-Deepika-Padukone.htm

Director Farah Khan has hurt the sentiments of Chembur businessman Abdul Samad Khan with her comments on TV show Dus Ka Dum.

Farah, who appeared with actress Deepika Padukone on the show on August 1, reportedly said, “Mard kutte hote hain, lekin wafadar nahin hote.”

Angered by the comment, Abdul filed a complaint against Farah with the Social Service Branch on Tuesday.

Abdul, who owns a consultancy firm, said, “Farah should not have forgotten that she was on television. Such offensive language against men is unacceptable.

Our Constitution grants equal rights to both the sexes and she has no right to compare men with animals.”

When asked whether he wanted an apology, Abdul said, “We will take the legal route now. Strict action should be taken against her.”

Senior Inspector

R R Joshi of the Social Service branch said, “It is not a cognisable offence, but we will take necessary action only after taking a legal opinion.”

Anita Basu, producer, Dus Ka Dum refused to comment saying, “I just learnt of the complaint. I don’t know what he is talking about.”

Despite repeated attempts Farah couldn’t be reached. She did not reply to SMSes either.

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Police officer set on fire by wife

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

ASI set on fire by wife on Int’l Men’s Day

http://www.deccanchronicle.com/national/asi-set-fire-wife-intl-mens-day-751

Wife burns the husband and husband sustains 85% burns, and the police is investigating the matter. We all know what happens when the wife just says ‘my husband has hit me’!
A quarrel over a petty issue took an ugly turn when an enraged wife set her husband, a police officer, on fire here, police said on Thursday.
The victim, 52-year-old assistant sub-inspector Balwant Pawar, sustained 85 per cent burns and is admitted to Government Medical College and Hospital, Aurangabad. Ironically, the incident took place on International Men’s Day.
According to police, Pawar had a tiff with his wife over some petty issue on Wednesday night when he returned home. Irked over this, she poured kerosene over him and set him on fire, they said.
Pawar was working with the MIDC Cidco police station. The Begampura police have registered a case and are investigating further.

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Police inspector commits suicide bec of wife torture

Posted by iluvshrutiverma on November 21, 2009

http://timesofindia.indiatimes.com/city/nagpur/PSI-shoots-himself-dead-with-service-revolver/articleshow/5249121.cms

PSI shoots himself dead with service revolver

NOTICE THE BIAS: It is known that the suicide happened because of the torture from wife, and the police is still probing the matter further. If it was a wife who died for any reason, her husband would have been arrested automatically!
AMRAVATI: A police sub inspector, presently posted at Akola Control Room, shot himself with his service revolver in the wee hours of Thursday at Amravati.
According to information from the police department, the deceased PSI has been identified as Amol Datir (42), a resident of Jagriti Colony in Amravati. He had been posted to Akola Control Room some time back. PSI Datir was an intelligent officer, his fellow officers have said. He had completed his MSc and then passed the MPSC exam in the first attempt in 1995.
On Wednesday night, at around 1.50am, Datir shot himself with his service revolver and died on the spot. Sources said that he had a dispute with his wife, who had lodged a complaint against him in 2006 at Akola police station. After this complaint, offences had been registered against PSI Datir under 498 section of IPC. It is also learnt that his wife had filed a case against him and demanded alimony from him. The hearing in this case was scheduled on Thursday.
Datir had been under tremendous tension after his wife lodged the complaint against him, as she had also levelled allegations against Datir’s family members also. Sources also said that Datir had been suffering from peptic ulcer since many days and had been on leave for the last three months. It is conjectured that Datir took the extreme step due to tremendous pressure on him.
Gadge Nagar police have registered offences under relevant sections of IPC and are probing the matter further.

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